Wednesday, 05 September 2018 11:11

Ashfaqullah Khan

Written by
Ashfaqullah Khan
22-10-1900 - 09-11-1927
Revolutionary
Sunday, 06 May 2018 11:55

Vishnu Shridhar Wakankar

Written by
Vishnu Shridhar Wakankar
Archeologist
Sunday, 06 May 2018 10:11

Vinayak Damodar Savarkar

Written by
Vinayak Damodar Savarkar
05-28 - 02-26
Revolutionary, Author
Sunday, 06 May 2018 09:17

Har Govind Khurana

Written by
Har Govind Khurana
09-01-1922 - 09-11-2011
Biochemist

अविभाजित भारतवर्ष के रायपुर (जिला मुल्तान, पंजाब) नामक कस्बे में 9 जनवरी 1922 को जन्में डॉ. हरगोविंद खुराना पटवारी पिता के चार पुत्रों में ये सबसे छोटे थे। पंजाब विश्वविद्यालय से सन् 1943 में बी. एस-सी. (आनर्स) तथा सन् 1945 में एम. एस-सी. (ऑनर्स) परीक्षाओं में उत्तीर्ण होकर भारत सरकार से छात्रवृत्ति पाकर ये इंग्लैंड गए और वहां लिवरपूल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ए. रॉबर्टसन् के अधीन अनुसंधान कर इन्होंने डाक्टरैट की उपाधि प्राप्त की।

श्रीनिवास रामानुजन
22-12-1887 - 26-04-1920
Maths

22 दिसम्बर उन महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्मदिवस है, जो विश्व के महानतम गणितज्ञों में गिने जाते हैं और जिन्हें गणित के क्षेत्र में वही सम्मान प्राप्त है, जो विज्ञान के क्षेत्र में अल्बर्ट आइन्सटीन को| उनके लिखे कई सूत्र या प्रमेय आज भी हल नहीं किये जा सके है, या कहें कि उनकी उपपत्ति आज भी उपलब्ध नहीं है, मगर उन सूत्रों का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में बहुत सफ़लता के साथ हो रहा है। पूरी दुनिया के तमाम महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ रामानुजन के द्वारा लिखे गये सूत्रों पर आज भी गहन शोध कार्य कर रहे हैं।

रामानुजम का जन्म तमिलनाडु में इरोड में एक बहुत ही साधारण परिवार में 22 दिसम्बर, 1887 को हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के बालक थे और अद्वितीय प्रतिभा, तर्कशक्ति और सृजनात्मकता के धनी थे। मद्रास विश्वविद्यालय से सन 1903 में उन्होंने दसवीं की परीक्षा कई पुरस्कारों के साथ पास की। हाई स्कूल के बाद ही उन्हें अत्यन्त प्रतिष्ठित “सुब्रयमण्यम छात्रवृत्ति” प्रदान की गयी जो कि उस समय गणित और अंग्रेजी के बहुत उत्कृष्ट छात्रों को दी जाती थी।

स्वामी श्रद्धानंद
09-11-1856 - 23-12-1926
Revolutionary

वैदिक धर्म, वैदिक संस्कृति, और आर्य जाति की रक्षा के लिए, मरणासन्न अवस्था से उसे पुनः प्राणवान एवं गतिवान बनाने के लिए और उसे सर्बोच्च शिखर पर पहुंचाने के लिये आर्य समाज ने सैंकड़ों बलिदान दिए हैं और उसमें प्रथम पंक्ति के प्रथम पुष्प हैं स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, जिनका 23 दिसम्बर को बलिदान दिवस है| स्वामी श्रद्धानंद का नाम देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करने वाले उन महान बलिदानियों में बहुत ही आदर के साथ लिया जाता है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर खुद को देश-समाज के लिये समर्पित कर दिया। धर्म, संस्कृति और देश पर बलिदान होना सबसे बड़ा कर्म माना जाता है और यह तब और भी बड़ा हो जाता है जब ये महान कार्य बगैर किसी स्वार्थ के किए जाएं।

स्वामी श्रद्धानंद ऐसे ही निस्वार्थ कार्य करने वाले महान धर्म और कर्म योद्धा थे। उनका श्रद्धानंद नाम उनके काम के मुताबिक पूरी तरह सही बैठता है। उन्होने स्वराज्य हासिल करने, देश को अंग्रेजी दासता से छुटकारा दिलाने और विधर्मी बने हिंदुओं का शुद्धिकरण करने, दलितों को उनका अधिकार दिलाने और पश्चिमी शिक्षा की जगह वैदिक शिक्षा प्रणाली गुरुकुल के मुताबिक शिक्षा का प्रबंध करने जैसे अनेक कार्य करने मे स्वयं को तिल तिल गला दिया।

Education doesn’t end when you get your degree. Every professional’s career can benefit from continuing education that helps him or her stay sharp and develop new skills. When teachers receive professional development, students benefit.

Professional development helps teachers keep their skill sets fresh and learn new skills. The science of teaching constantly finds new ways to get through to students, but that’s not the only reason professional development is important for teachers. Teachers also need to be able to prepare their students to succeed in a changing world — they need to be able to teach students how to use emerging technologies, how to navigate evolving workplaces, how to communicate effectively, and how to think critically and solve problems. The more professional development teachers get, the more likely students are to succeed. Continuing Education Helps Students Learn

Monday, 25 December 2017 04:22

How to be Fair and Ethical in the Classroom

Written by

Many aspects of the teaching assistant's role may create ethical dilemmas of one sort or another. Your roles as adviser, evaluator, exam administrator, authority figure and peer have the potential to become problematic at times, often because they present conflicting demands. Because fairness is a perception based on interpretations of behavior, not intentions, many instructors may inadvertently engage in what students perceive to be unfair behavior.

Although one might expect students to be most concerned with outcome or procedural fairness because it affects their grades, Dr. Rita Rodabaugh has found that students consider violations of interactional fairness to be the most severe. Interactional fairness refers to the nature of the interaction between instructor and students and encompasses impartiality, respect, concern for students, integrity and propriety.